एक पेड़ के ऊपर एक कौवा रहता था। हर रोज वह एक चील के कृत्यों को देखकर आश्चर्य से देखता था।
चील का एक पहाड़ पर एक घोंसला ऊँचा था। वह एक भेड़ के बच्चे को पकड़ने के लिए वहाँ से झपट्टा मारता था और एक ही बार में सभी उड़ जाता था।
चील के करतब से कौआ चकित रह गया।
एक दिन वह इतना उत्साहित था कि वह बाज की नकल करना चाहता था। इसलिए वह जितना ऊपर जा सकता था उतनी ऊपर उड़ता गया। वहां से वह झपट्टा मारने लगा। वह और नीचे उतर आया। लेकिन अफसोस, वह खुद को नियंत्रित नहीं कर सका। वह जमीन पर गिरा और उसकी चोंच टूट गई।
MORAL: खतरे की नकल करना खतरे में पड़ जाएगा।
चील का एक पहाड़ पर एक घोंसला ऊँचा था। वह एक भेड़ के बच्चे को पकड़ने के लिए वहाँ से झपट्टा मारता था और एक ही बार में सभी उड़ जाता था।
चील के करतब से कौआ चकित रह गया।
एक दिन वह इतना उत्साहित था कि वह बाज की नकल करना चाहता था। इसलिए वह जितना ऊपर जा सकता था उतनी ऊपर उड़ता गया। वहां से वह झपट्टा मारने लगा। वह और नीचे उतर आया। लेकिन अफसोस, वह खुद को नियंत्रित नहीं कर सका। वह जमीन पर गिरा और उसकी चोंच टूट गई।
MORAL: खतरे की नकल करना खतरे में पड़ जाएगा।

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